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Ranchi : जब जीवन तुम्हारा है नहीं तो खत्म क्यों किया ? – डॉ. वंदना अग्रवाल

केस वन : टीसीएस के कर्मचारी, मुंबई के एक युवा ने जान दे दी, वह शादी से परेशान था। उसे कानूनी मदद भी नहीं मिल पा रही थी।

केस टू : आपने नेपाल की एक इंजीनियरिंग स्टूडेंट के बारे में सुना होगा। उसने एक लड़के के टॉर्चर की वजह से जान दे दी। लड़की ओडिशा के इंजीनियरिंग संस्थान में पढ़ रही थी। आत्महत्या कायरता है-यह अनेक लोगों ने कहा है, लिखा है। मैं भी मानती हूं कि आत्महत्या कायरता है और मैं यह भी सोचती हूं कि किसी को इसका समर्थन नहीं करना चाहिए। बड़ा सवाल है कि लोग आत्महत्या क्यों करते हैं? मैं समझती हूं की आत्महत्या करने वालों के पास जीने की कोई वजह नहीं बची होगी या वे दुःख – परेशानी से हार गए होंगे। हो सकता है कि वे समाज के नियम क़ायदों से इस तरह टूट चुके होंगे कि उन्हें इतना बड़ा कदम उठाना पड़ा।

आत्महत्या से क्या होगा ?

किसी आत्महत्या के बाद क्या होता है? लोग कुछ दिनों तक चर्चा करेंगे, कैंडल जला लेंगे । आगे? कुछ नहीं


क्या आत्महत्या से समस्या सुलझ गई? क्या जिस समस्या का सामना आत्महत्या करने वाला शख्स कर रहा था, वह उसके अकेले की समस्या थी? हजारों-लाखों लोग होंगे। फिर किसी खास ने जान क्यों गंवाई? दरअसल, हम यह भूल जाते हैं कि यह जीवन हमारा अकेले का नहीं है। यह परिवार, समाज, देश का भी है। जब जीवन हमारा अकेले का है नहीं, तो उसे खत्म करने वाले हम कौन? आपने सुना होगा- सारे जहां की अमानत है ये, ये जीवन हमारा -हमारा नहीं। जिंदगी इतनी कीमती है कि इसे व्यक्ति या किसी भी समस्या के नाम पर खत्म नहीं किया जा सकता है। जब भी जीवन में निराशा का भाव आए तो सोचिए कि देश -दुनिया में लाखों लोग इस तरह की समस्या का सामना कर रहे होंगे। जिंदगी की जंग आप भी लड़िए, कोई न कोई समाधान एक दिन निकलेगा।

दुनिया इतनी बुरी नहीं है

दुनिया इतनी भी बुरी नहीं है कि किसी समस्या का समाधान नहीं मिले। दुनिया में सभी तरह के लोग हैं। घटिया सोच की हैं, तो अच्छी सोच वाले भी है। धोखेबाज हैं तो मददगार भी। इसलिए अपना ध्यान अच्छे, लोग-अच्छी सोच पर लाइए। यह सोचे कि सबसे बढ़िया मैं हूं, बाकी सब खराब, यह भी घटिया सोच है। एक-दूसरे की सुनिए। एकतरफा सोच सही नहीं होता। थोड़ा ठहरकर दूसरे को सुनने और समझने की कोशिश करें। अपने आप को सामने वाले की जगह रख कर देखें, तभी आप उसको बेहतर तरीक़े से समझ पाएंगे। ऐसा करने से समस्या का समाधान मिलेगा। दया मत करिए, एक दूसरे को समझिए। ऐसा करने पर ही बेहतर परिवार और समाज बनेगा।

(लेखिका डेंटिस्ट हैं)

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