Jamshedpur : अमलकी या रंगभरी एकादशी कब है? जानें डेट और महत्व

पुण्य नक्षत्र में रखा जाएगा व्रत, अमला के पेड़ की पूजा के साथ ही अन्नपूर्णा के दर्शन से मिलेगा विशेष लाभ.
जमशेदपुर : आमलकी एकादशी इस बार 10 मार्च सोमवार को मनाई जाएगी। आमलकी एकादशी का महत्व अक्षय नवमी के समान है। पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु ने कहा है कि जो प्राणी स्वर्ग और मोक्ष प्राप्ति की कामना रखते हैं, उनके लिए आमलकी एकादशी का व्रत अत्यंत श्रेष्ठ है। फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी और रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत का विशेष महत्व है। ये व्रत रखने से कुल 12 महीने की एकादशी यानी साल के सभी 24 एकादशी का पुण्य प्राप्त होता है। इस एकादशी का महत्व इसलिए और भी बढ़ जाता है क्योंकि इसी दिन ही भगवान शिव, माता पार्वती से विवाह के उपरांत पहली बार अपनी प्रिय काशी नगरी आए थे।
भगवान शिव ने देवी पार्वती के साथ इस दिन होली खेली थी
और मान्यता के अनुसार वहां आकर शिव ने देवी पार्वती के साथ होली खेली थी। पुण्य नक्षत्र में व्रत रखा जाएगा। इस एकादशी व्रत पर अमला के पेड़ की पूजा के साथ ही अन्नपूर्णा के दर्शन से विशेष लाभ मिलता है। पुरोहित अरुण त्रिपाठी के बताया कि एकादशी का महत्व अक्षय नवमी के समान है। पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु ने कहा है- कि जो प्राणी स्वर्ग और मोक्ष प्राप्ति की कामना रखते हैं,उनके लिए आमलकी एकादशी का व्रत अत्यंत श्रेष्ठ है।आंवले के वृक्ष की पूजा का खास विधान है। क्योंकि इसी दिन सृष्टि के आरंभ में सबसे पहले आंवले के वृक्ष की उत्पत्ति हुई थी। आंवला वृक्ष भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इसके स्मरण मात्र से गोदान का फल मिलता है, स्पर्श करने से दोगुना और फल भक्षण करने से तिगुना फल प्राप्त होता है। इसके मूल में विष्णु, उसके ऊपर ब्रह्मा, तने में रूद्र, शाखाओं में मुनिगण, टहनियों में देवता, पत्तों में वसु, फूलों में मरुदगण और फलों में समस्त प्रजापति वास करते हैं।
तिथि प्रारंभ
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 09 मार्च को सुबह 07 बजकर 45 मिनट पर हो रही है। वहीं, तिथि का समापन 10 मार्च को सुबह 07 बजकर 44 मिनट पर होगा है। ऐसे में 10 मार्च को आमलकी एकादशी मनाई जाएगी।