पीएम मोदी ने पांच सालों में की ये पांच बड़ी गलती। 2019 में हार पक्की।

बीजेपी, भारतीय जनता पार्टी, पीएम, नरेंद्र मोदी

नमस्कार दोस्तों,

दोस्तों, जैसा की हम सभी जानते हैं की माजूदा सरकार का कार्यकाल समाप्ति पर है और चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव 2019 के तिथियों की घोषणा कर दी है। चुनाव के तिथियों के ऐलान के साथ ही सभी राजनितिक पार्टियों ने कमर कस ली है और जीत के लिए सीटों के उधेड़ बन पर लगे हुए हैं। चाहे जो भी हो पर इस बार कोई भी बड़ी पार्टी अकेले अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल करता नहीं दिख रहा है।

हम करें तो गठबंधन वो करे तो ठगबंधन:

 कुछ दिन पहले तक जो बीजेपी कांग्रेस एवं अन्य पार्टियों के बीच हो रहे महा गठबंधन को महा घोटाला, महा मिलावट, ठगबंधन और न जानते किन किन नामों से सम्बोधित कर रही थी वह खुद ऐसी पार्टी से गठबंधन कर रही है की यदि मज़बूरी नहीं होती तो शायद उनके करीब भी बैठना पसंद नहीं करती। निषाद पार्टी के साथ हुए इस गठबंधन के बाद पीएम नरेंद्र मोदी किस मुँह से बाकि पार्टियों के गठबंधन को महा मिलावट कह रहे हैं यह सोचने वाली बात है।

आइए जानते हैं क्या है निषाद पार्टी का इतिहास :

2016 में अस्तित्व में आई निषाद पार्टी ने भले ही अपने छेत्र में नाम कमाने में कामयाबी हासिल कर ली है पर अभी भी इसे एक मज़बूत पार्टी के रूप में उभरने में काफी वक़्त और उपलब्धि बाकी है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव में समाजवादी पार्टी को मिली जीत के बाद निषाद पार्टी पहली बार सुर्ख़ियों में आई है। देखते हैं की हाल ही में अस्तित्व में आई निषाद पार्टी, भारतीय जनता पार्टी को 2019 लोकसभा चुनाव में कितना फायदा पहुंचा पाती है।

मोदी के वो वादे जो जीत के बाद जुमला बन गए :

दोस्तों जब भी किसी भी सरकार का कार्यकाल पूरा होता है तो अगले चुनाव में उसकी मज़बूती या कमज़ोरी उसके द्वारा किए कार्य से तय होती है। आइए जानते हैं भारतीय जनता पार्टी और पीएम नरेंद्र मोदी ने किन वादों के दम पर 2014 में पूर्ण बहुमत हासिल किया था और अपने वादों पर कितना खरा उतर पाई।

1 . काला धन। 

प्रधानमंत्री मोदी और उनके कई भक्तों ने यह कहा था की यदि बीजेपी की सरकार बनी और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तो विदेश ( स्वीस बैंक ) में भारत की जितनी भी संपत्ति काला धन के रूप में जमा है उसे वापिस लाया जाएगा। जिनके भी नाम से  विदेशों में काला धन जमा है उनके नाम सार्वजनिक किया जाएगा एवं उनपर कड़ी कार्यवाही की जायेगी। पर जीत मिलने के बाद मोदी ने खुद अपने इस वाले से यह कहकर पलड़ा झाड़ लिया की विदेशों में जमा काले धन का आंकलन कर पाना या उसे वापिस लाना इतना आसान नहीं और नहीं वो कालाधन रखने वालों के नाम सार्वजनिक कर सकते हैं। कुल मिलाकर मोदी जी का यह वादा जुमला साबित हुआ।

2 . हर खाते में 15 लाख। 

प्रधान मंत्री मोदी ने अपने 2014 के चुनावी रैलियों के दौरान अपने भाषण में कहा था की अगर उनकी सरकार आई तो देश के हर खाते में 15 लाख रुपये यूँ ही आ जायेंगे। मोदी जी का यही वादा उनके लिए सबसे बड़ा हथियार साबित हुआ और देश की जनता ने उन्हें पूर्ण बहुमत से विजयी बनाया। मोदी की सरकार के आने के बाद जब लगातार मंहगाई बढ़ती गई तब जनता ने उनसे 15 लाख के वादे का हिसाब पूछा पर बीजेपी ने खुद अपने इस वादे को चुनावी जुमला बताते हुए देश की जनता के भावनाओं का मज़ाक उड़ा दिया।

3 . जनता को कभी टैक्स नहीं देना पड़ेगा। 

भारतीय जनता पार्टी के कई प्रचारकों ने यह कहा था की यदि  मोदी जी की सरकार बनी तो वो सबसे पहले देश का काला धन वापिस लाएंगे जिससे देश की अर्थव्यवस्था इतनी मज़बूत हो जायेगी की देश की जनता को कई सालों तक टैक्स नहीं देना पड़ेगा। पर सत्ता में आते ही उन्होंने फ्यूल मार्केट को निजी हाथों में दे दिया और देश में जीएसटी लागु करके मिडिल क्लास लोगों की कमर तोड़ दी।

 

 

2019 लोकसभा चुनाव : जानिये किसकी बनेगी सरकार।

 

 जब इतने से भी साहब का दिल नहीं भरा तो नोटबंदी करके लोगों के गुल्लक में जमा पैसे को भी रातों रात काला धन घोषित कर दिया और देश को पुरे दो महीनों तक लाइन में खड़ा कर दिया। नोटबंदी से 200 से भी अधिक गरीब और बेगुनाह लोगों की जान ले ली।

4 . रोजगार।

साहब ने चुनाव से पहले देश की जनता से वादा किया था की यदि उनकी सरकार बनी तो हर साल दो करोड़ लोगों को रोजगार देंगे पर नोटबंदी करके करड़ों लोगों से उनका लगा लगाया रोजगार छीन लिया। इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है की मोदी सरकार आने के बाद देश में बेरोजगारी का स्तर सबसे ज्यादा है।

हद तो तब हो गई जब मोदी जी ने देश के पढ़े  लिखे नौजवानों को नौकरी के नाम पर पकोड़े तलने और चाय बेचने सलाह से डाली।

5 .अयोध्या राम मंदिर। 

देश के हिन्दू वोटर्स को लुभाने के लिए मोदी जी  ने देश की जनता से यह वादा किया था की यदि उनकी सरकार आई तो वे अयोध्या मंदिर मस्ज़िद का विवाद सुलझा लेंगे और अपनी सरकार के पांच सालों के भीतर अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण भी करा देंग।मोदी सरकार के पांच साल पुरे हो चुके हैं पर राम मंदिर का मामला अभी भी कोर्ट में है।

अगर देश की जनता मोदी की अंधी भक्ति बंद करके मोदी जी को उन्ही के वादों की कसौटी पर तौले तो पाएंगे की मोदी जी ने अपने  पांच साल के कार्यकाल में सिवाए जुमलेबाज़ी और विदेश यात्रा के और कुछ भी नहीं किया। अब यह जनता को तय करना है के उन्हें अगला मौका देना है या नहीं।

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